राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के आलोक में भारतीय ज्ञान परंपरा का विद्यालयीय पाठ्यक्रम में समावेशन
Abstract
भारतीय शिक्षा-व्यवस्था लंबे समय तक ऐसे पाठ्यक्रम से प्रभावित रही जिसमें स्थानीय जीवन, भारतीय भाषाओं, पारंपरिक ज्ञान, लोककला, शिल्प, कृषि, पर्यावरणीय अनुभव और भारतीय चिंतन की विविध धाराओं को अपेक्षित स्थान नहीं मिल सका। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने शिक्षा को भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ से जोड़ते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा को विद्यालयीय पाठ्यक्रम में वैज्ञानिक, प्रासंगिक और अनुभवात्मक रूप में सम्मिलित करने का स्पष्ट प्रस्ताव रखा है। नीति के अनुसार भारतीय ज्ञान परंपरा में केवल प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन नहीं, बल्कि गणित, खगोलशास्त्र, दर्शन, योग, वास्तुकला, चिकित्सा, कृषि, अभियांत्रिकी, भाषा-विज्ञान, साहित्य, खेल, शासन, जनजातीय ज्ञान और पर्यावरण संरक्षण जैसी विविध ज्ञान-धाराएँ सम्मिलित हैं।
प्रस्तुत शोध-लेख राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा—आधारभूत चरण 2022 तथा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा—विद्यालयी शिक्षा 2023 के विश्लेषण पर आधारित है। लेख में आधारभूत, प्रारंभिक, मध्य और माध्यमिक स्तर पर भारतीय ज्ञान परंपरा के चरणबद्ध समावेशन की संभावनाओं का विवेचन किया गया है। भाषा, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कला, शारीरिक शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा और पर्यावरण अध्ययन में स्थानीय एवं पारंपरिक ज्ञान के उपयोग के व्यावहारिक उदाहरण भी प्रस्तुत किए गए हैं।
अध्ययन से स्पष्ट होता है कि भारतीय ज्ञान परंपरा का सार्थक समावेशन अलग और बोझिल विषय जोड़ने से नहीं, बल्कि वर्तमान विषयों, शिक्षण-पद्धतियों और विद्यालयी गतिविधियों में अंतर्विषयी रूप से उसे जोड़ने से संभव है। इसके लिए प्रमाण-आधारित सामग्री, प्रशिक्षित शिक्षक, स्थानीय समुदाय की सहभागिता, भारतीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण संसाधन और रटने के स्थान पर परियोजना एवं अनुभव आधारित मूल्यांकन आवश्यक है। परंपरागत दावों का वैज्ञानिक परीक्षण तथा भारतीय समाज की भाषायी, धार्मिक, क्षेत्रीय, जनजातीय और बौद्धिक विविधता का सम्मान इस प्रक्रिया की अनिवार्य शर्त है।
मुख्य शब्द: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, भारतीय ज्ञान परंपरा, विद्यालयीय पाठ्यक्रम, अनुभवात्मक अधिगम, मातृभाषा, स्थानीय ज्ञान, मूल्य शिक्षा।