भारतीय राजनीति का पर्यावरण परिवर्तन पर प्रभाव
Abstract
यह शोध पत्र भारतीय राजनीति और पर्यावरण परिवर्तन के मध्य संबंध का अध्ययन करता है। वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरणीय विषय नहीं रह गया बल्कि यह एक सामाजिक एवं राजनीतिक विषय बन चुका है। भारत जैसे विकासशील देशों में पर्यावरणीय नीतियां विकास की प्राथमिकताएं, चुनावी राजनीति एवं दलीय राजनीति पर्यावरण परिवर्तन को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है इस शोध का उद्देश्य यह समझना है कि भारतीय राजनीति निर्णय, नीतिगत ढांचों पर्यावरणीय संतुलन को किस प्रकार प्रभावित करता है। शोध में विश्लेषित किया गया है कि भारतीय संविधान में पर्यावरण से संबंधित अनुच्छेद जैसे 48(A) और 51(A) होने के पश्चात् भारतीय राजनीति में पर्यावरण को प्राथमिकता न देकर विकास को प्राथमिकता दी जाती है। औद्योगिकरण , नगरीकरण, बड़े खनन अक्सर राजनीति लाभ और आर्थिक वृद्धि के नाम पर विकसित किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त चुनावी राजनीति में भी पर्यावरणीय मुद्दों का स्थान सीमित किया गया है। इसके साथ यह अध्ययन राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 तथा न्यायपालिका की पर्यावरण में सक्रिय भूमिका आदि का भी अध्ययन करेगा।
अतः इस शोध पत्र के निष्कर्ष में कहा जा सकता है कि यदि राजनीति अल्पकालिक लाभ के स्थान पर दीर्घकालिक पारिस्थितिक संतुलन को प्राथमिकता दे तो पर्यावरण परिवर्तन को कम किया जा सकता है इसके लिए आवश्यक है कि सरकार पारदर्शी नीति बनाए पर्यावरण में जन भागीदारी को सुदृढ़ किया जाए केंद्र राज्य के बीच समन्वय बढ़ाया जाए तथा विकास की अवधारणा के बजाय सतत विकास की अवधारणा को अपनाया जाए।
मुख्य शब्द – पर्यावरण परिवर्तन, जलवायु परिवर्तन, भारतीय राजनीति, पर्यावरणीय शासन, सतत विकास हरित विकास, जन सहभागिता, पारदर्शी नीतियां, राष्ट्रीय योजना, आदि महत्वपूर्ण शब्दों का प्रयोग हम इस शोध पत्र में करेंगे।